SECL, जल जीवन मिशन और दो नगर पंचायतों की खींचतान… सज़ा भुगत रही जनता
झगड़ाखांड से खोंगापानी तक सड़क बनी तालाब, जिम्मेदारी लेने को कोई तैयार नहीं
खबर जागरण न्यूज(देश की आवाज)
खोंगापानी/एमसीबी। झगड़ाखांड नगर पंचायत से खोंगापानी नगर पंचायत को जोड़ने वाली सड़क इन दिनों विकास की नहीं, बल्कि लापरवाही की मिसाल बन चुकी है। बरसात में सड़क की हालत ऐसी हो गई है कि सड़क कम और तालाब ज्यादा नजर आती है। रोजाना राहगीर फिसल रहे हैं, वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं और मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में भारी परेशानी उठानी पड़ रही है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इस बदहाल सड़क का जिम्मेदार कौन है? SECL, जल जीवन मिशन, नगर पंचायत झगड़ाखांड, नगर पंचायत खोंगापानी या फिर जनप्रतिनिधि?
जल जीवन मिशन के तहत सड़क के दोनों ओर पाइपलाइन बिछाने के लिए गड्ढे खोद दिए गए। पाइपलाइन तो बिछ गई, लेकिन न पानी की टंकी तैयार हुई और न ही लोगों के घरों तक नियमित पानी पहुंचा। स्थानीय लोगों का कहना है कि पाइपलाइन से पानी कम, हवा ज्यादा निकल रही है।
दूसरी ओर, स्थानीय लोगों का आरोप है कि नगर पंचायत को SECL से लाखों रुपये का टैक्स मिलता है, लेकिन सड़क की हालत सुधारने की दिशा में ठोस पहल दिखाई नहीं दे रही। वहीं SECL की ओर से बार-बार यही जवाब सामने आता है कि टेंडर हो चुका है और जल जीवन मिशन का कार्य पूरा होने के बाद सड़क मरम्मत का काम शुरू किया जाएगा।
गौर करने वाली बात यह है कि गर्मी के दिनों में मीडिया ने लगातार चेतावनी दी थी कि यदि समय रहते सड़क की मरम्मत नहीं हुई तो बरसात में हालात और बदतर हो जाएंगे। लेकिन न संबंधित विभागों ने गंभीरता दिखाई, न प्रशासन ने और न ही सत्ता एवं विपक्ष के जनप्रतिनिधियों ने। आज वही सड़क लोगों के लिए मुसीबत बन चुकी है।
अब हालात बिगड़ने के बाद राजनीतिक बयानबाजी और धरना-प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। कभी कांग्रेस के नेता पानी में बैठकर धरना दे रहे हैं तो कभी भाजपा के जनप्रतिनिधि नगर पंचायत का घेराव कर रहे हैं। लेकिन सवाल यह है कि जब सड़क धीरे-धीरे मौत का रास्ता बन रही थी, तब सबकी चुप्पी क्यों थी?
पानी में बैठकर हुए धरने के दौरान नायब तहसीलदार ने एक सप्ताह में गड्ढे भरवाने का आश्वासन दिया था। इसके बाद नगर पंचायत कार्यालय में हुई बैठक में एसडीएम ने भी 10 दिन का समय मांगा। अब जनता की निगाहें इन आश्वासनों पर टिकी हैं।
जनता पूछ रही है-
सड़क कब बनेगी दुर्घटनाएं कब रुकेंगी जिम्मेदारी आखिर कौन लेगा विकास के नाम पर खोदे गए गड्ढों का हिसाब कौन देगा?चुनाव के समय यही सड़क “विकास का रास्ता” कहलाती है, लेकिन आज बरसात में यह “वायदों का तालाब” बन चुकी है। राजनीति अपने-अपने मंच से जारी है, आश्वासन भी मिल रहे हैं, लेकिन रोज कीचड़, गड्ढों और दुर्घटनाओं का सामना आम जनता ही कर रही है।
