शरद पूर्णिमा पर अमृतमयी खीर वितरण के साथ किया गया आत्मिक आयोजन
अमृत की खोज अपने अंदर करें -उपाध्याय
मनेद्रगढ़। लोक संस्कृति और भारतीय दर्शन के प्रतीक-” शरद पूर्णिमा”के अवसर पर एमसीबी योग सेवा समिति के द्वारा सरस्वती शिशु मंदिर के प्रांगण में वरिष्ठ योग साधकों की उपस्थिति में आत्मिक आयोजन किया गया।
शरद पूर्णिमा की दूधिया चांदनी एवं खीर में अमृत की बूंदे तलाशने की लोक संस्कृति पर केंद्रित इस कार्यक्रम में योग , आयुर्वेद एवं आध्यात्मिक पृष्ठभूमि से जुड़े एवं नियमित योग साधक एवं साधिकाएं विशेष रूप से उपस्थित थी। कार्यक्रम का संचालन करते हुए योग समिति के जिला प्रशिक्षक सतीश उपाध्याय ने कहा कि -शरद पूर्णिमा की दूधिया चांदनी और छत पर रखी खीर में अमृत की बूंदे तलाशने की हमारी लोक संस्कृति केवल मौसमी उल्लास ही नहीं बल्कि भारतीय दर्शन का वह जीवन प्रतीक है जो प्रकृति और मनुष्य के बीच अटूट आत्मीयता को रेखांकित करता है।
श्री उपाध्याय ने शरद पूर्णिमा पर्व के पारंपरिक पौराणिक प्रसंगों को सुख समृद्धि से जोड़ते हुए कहा कि यदि हमारा अंतरण ईर्ष्या, द्वेष अहंकार की धूल से आच्छादित है तो प्रकृति की असीम अनुकंपा और ब्राह्मड ऊर्जा कभी भी मनुष्य के मन को तृप्त नहीं कर सकती।
शरद पूर्णिमा में खीर में अमृत वर्षा के पौराणिक संदर्भों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि वर्तमान के तनाव अशांति और आंतरिक असंतोष के दौर में सच्चा अमृत किसी आकाश में नहीं बल्कि हमारे भीतर निवास करता है। शरद पूर्णिमा पर केवल खीर को खुले आसमान के नीचे रखना ही पर्याप्त नहीं है बल्कि अपने भीतर की चेतना के द्वार खोलकर उसे क्षमा करुणा सेवा और प्रेम से परिपूर्ण करना ही इस महापर्व का वास्तविक मर्म है। योग सत्र के दौरान शरद पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित इस आत्मिक आयोजन में वरिष्ठ पत्रकार प्रवीण निशि ,योग साधक दिवाकर मिश्रा, भैरव प्रसाद केसरवानी, पवन पोद्दार, धर्मराज वर्मा, बलवीर कौर, जगदंबा अग्रवाल, विकास कुमार गोयल ,राकेश अग्रवाल, पिंकी सलूजा, रेखा उपाध्याय, विमला यादव, कविता मंगतानी आदि उपस्थित थे।
अंत में शरद पूर्णिमा की दूधिया चांदनी से युक्त अमृतमयी खीर का वितरण समस्त योग साधकों के मध्य किया गया।
खबर जागरण न्यूज (देश की आवाज)
