सूचना के अधिकार को जनपद पंचायत मनेंद्रगढ़ का ठेंगा
प्रथम अपीलीय अधिकारी के आदेश के एक माह बाद भी नहीं दी जानकारी, जन सूचना अधिकारी पर भ्रामक जानकारी देने का आरोप
मनेंद्रगढ़ एमसीबी। जनपद पंचायत मनेंद्रगढ़ में सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की अनदेखी का मामला सामने आया है। एक आवेदक द्वारा मांगी गई जानकारी को प्रथम अपीलीय अधिकारी के स्पष्ट आदेश के बावजूद आज तक उपलब्ध नहीं कराया गया है। मामले को लेकर विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, आवेदक ने 30 जनवरी 2026 को सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत आवश्यक दस्तावेज और जानकारी मांगी थी। निर्धारित समय सीमा में जानकारी नहीं मिलने पर जन सूचना अधिकारी द्वारा यह कहते हुए आवेदन निरस्त कर दिया गया कि आवेदन में एक से अधिक विषय शामिल हैं और अलग-अलग आवेदन प्रस्तुत किए जाएं।
इसके बाद आवेदक ने पुनः 06 मार्च 2026 को सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत नया आवेदन प्रस्तुत किया। हैरानी की बात यह रही कि जन सूचना अधिकारी ने उसी दिन 06 मार्च 2026 को आवेदक को पत्र जारी कर जवाब दे दिया। जबकि सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 7(1) के तहत जानकारी उपलब्ध कराने अथवा कारण बताने के लिए अधिकतम 30 दिवस का समय निर्धारित है।
जन सूचना अधिकारी ने अपने जवाब में लिखा कि मांगी गई कैश बुक एवं चेक रजिस्टर 12 जनवरी 2026 को मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत एमसीबी के आकस्मिक निरीक्षण हेतु उपलब्ध कराए गए थे, इसलिए अभिलेख कार्यालय में उपलब्ध नहीं हैं।
मामले में आवेदक द्वारा प्रथम अपील दायर किए जाने पर प्रथम अपीलीय अधिकारी ने 09 अप्रैल 2026 को आदेश जारी करते हुए कहा कि वर्तमान में संबंधित अभिलेख कार्यालय में उपलब्ध हैं, अतः जन सूचना अधिकारी नियमानुसार जानकारी उपलब्ध कराएं। इसके बावजूद आदेश जारी होने के लगभग एक माह बाद भी आवेदक को जानकारी नहीं दी गई है।
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो रहा है कि जब जन सूचना अधिकारी ने अपने पत्र में अभिलेख कार्यालय में उपलब्ध नहीं होने की बात कही थी, तो फिर प्रथम अपीलीय अधिकारी ने अपने आदेश में अभिलेख उपलब्ध होने की पुष्टि कैसे कर दी। इससे यह प्रतीत होता है कि या तो जन सूचना अधिकारी को सूचना का अधिकार अधिनियम के नियमों की जानकारी नहीं है, या फिर जानबूझकर भ्रामक जानकारी देकर सूचना छिपाने का प्रयास किया गया।
आवेदक का आरोप है कि जिस जानकारी की मांग की गई है, उसमें अनियमितता या वित्तीय गड़बड़ी उजागर होने की आशंका है, इसी कारण विभाग जानकारी देने से बच रहा है।
अब देखने वाली बात होगी कि उच्च अधिकारी इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं और आवेदक को आखिर कब तक वांछित जानकारी उपलब्ध कराई जाती है।
राजेश सिन्हा,8319654988
