खोंगापानी नगर पंचायत में 16.32 करोड़ की FD का मामला, उठ रहे कई सवाल
पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष के दावे के बाद सियासत गरमाई, भाजपा ने किया आंदोलन; जांच की मांग के बीच अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के अलग-अलग बयान
एमसीबी। नगर पंचायत खोंगापानी में करीब 16 करोड़ 32 लाख रुपये की एफडी किए जाने के कथित मामले को लेकर इन दिनों राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में सवाल उठ रहे हैं। कुछ दिन पहले पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष धीरेन्द्र विश्वकर्मा की ओर से सोशल मीडिया के माध्यम से 16 करोड़ 32 लाख रुपये की एफडी को लेकर सवाल उठाए गए थे। इसके बाद भाजपा की ओर से मशाल रैली निकाली गई और आंदोलन करते हुए हड़ताल भी शुरू की गई।
बाद में भाजपा जिला अध्यक्ष के हस्तक्षेप के बाद हड़ताल स्थगित कर मामले की जांच कराने की बात सामने आई।
मौके पर पहुंचकर जब पड़ताल की गई तो सामने आया दूसरा आंकड़ा
मामले की हकीकत जानने के लिए जब खबर जागरण न्यूज (देश की आवाज) की टीम नगर पंचायत खोंगापानी पहुंची और भाजपा नेता एवं पूर्व पार्षद पी. मनी से बातचीत की, तो उन्होंने बताया कि एसईसीएल की ओर से नगर पंचायत खोंगापानी के खाते में करीब 9 करोड़ 37 लाख रुपये जमा किए गए थे।
अब यहां सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा होता है कि यदि एसईसीएल की ओर से 9 करोड़ 37 लाख रुपये नगर पंचायत के खाते में जमा किए गए, तो फिर 16 करोड़ 32 लाख रुपये की एफडी किस राशि से की गई? यदि एफडी वास्तव में हुई है तो उसका स्रोत क्या है और यह राशि नगर पंचायत के खाते में कब और किस माध्यम से आई?
एसईसीएल से मिलने वाली राशि के बावजूद विकास कार्यों पर सवाल
खोंगापानी क्षेत्र में एसईसीएल से जुड़ी सुविधाओं और संसाधनों को लेकर भी स्थानीय स्तर पर सवाल उठाए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों के अनुसार क्षेत्र की सड़क, पानी और बिजली जैसी कई व्यवस्थाएं एसईसीएल से जुड़ी हुई हैं, ऐसे में नगर पंचायत के पास आने वाली बड़ी राशि के बावजूद अपेक्षित विकास कार्य जमीन पर दिखाई क्यों नहीं दे रहे हैं- यह भी जांच का विषय है।
CMO का बयान- लेजर और कैशबुक तक उपलब्ध नहीं
मामले में नगर पंचायत के मुख्य नगर पालिका अधिकारी का बयान भी महत्वपूर्ण है। सीएमओ के अनुसार, जब से उन्होंने नगर पंचायत का प्रभार संभाला है, तब से उन्हें लेजर और कैशबुक उपलब्ध नहीं कराई गई है। उन्होंने यह भी बताया कि नगर पंचायत में इंजीनियर और कैशियर की भी व्यवस्था नहीं है, जिसके कारण उन्हें कामकाज संचालित करने में परेशानी हो रही है।
यदि नगर पंचायत के वित्तीय अभिलेख ही उपलब्ध नहीं हैं, तो फिर करोड़ों रुपये की एफडी और उसके स्रोत की पुष्टि कैसे होगी- यह सवाल भी अब सामने आ रहा है।
वर्तमान अध्यक्ष बोलीं- 17 महीने से अध्यक्ष हूं, मुझे जानकारी नहीं
वहीं नगर पंचायत खोंगापानी की वर्तमान अध्यक्ष ललिता राम यादव ने कहा कि उन्हें अध्यक्ष बने करीब 17 महीने हो चुके हैं, लेकिन उन्हें इस संबंध में किसी प्रकार की जानकारी नहीं है। उनका कहना है कि यदि किसी के पास 16 करोड़ 32 लाख रुपये की एफडी या अन्य वित्तीय लेनदेन से संबंधित जानकारी है तो वह दस्तावेज और प्रमाण के साथ सामने आए।
अब जांच से ही सामने आएगी सच्चाई
एक तरफ पूर्व अध्यक्ष की ओर से 16 करोड़ 32 लाख रुपये की एफडी का दावा किया जा रहा है, वहीं भाजपा नेता द्वारा एसईसीएल से 9 करोड़ 37 लाख रुपये मिलने की बात कही जा रही है। दूसरी ओर वर्तमान सीएमओ वित्तीय अभिलेख उपलब्ध नहीं होने की बात कह रहे हैं और नगर पंचायत अध्यक्ष मामले की जानकारी से अनभिज्ञता जता रही हैं।
ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि 16 करोड़ 32 लाख रुपये की एफडी वास्तव में हुई है या नहीं, यदि हुई है तो राशि का स्रोत क्या था, एफडी किस बैंक में और किसके अधिकृत आदेश से की गई, राशि कब जमा हुई और नगर पंचायत के वित्तीय अभिलेखों में इसका उल्लेख कहां है।
इन सवालों का जवाब बैंक रिकॉर्ड, एफडी दस्तावेज, कैशबुक, लेजर, बैंक स्टेटमेंट और नगर पंचायत के प्रस्ताव एवं भुगतान अभिलेखों की जांच से ही स्पष्ट हो सकता है।
खबर जागरण न्यूज (देश की आवाज)
