नकली मंगलसूत्र मामला: कांग्रेस नेता की शिकायत पर मुहर, कलेक्टर की जांच में अनियमितताएं उजागर, संचालक की प्रेस विज्ञप्ति सवालों के घेरे में
मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना में कथित नकली मंगलसूत्र मामला: शिकायत सही निकली, जांच से पहले ही विभाग ने दे दी थी क्लीन चिट, कलेक्टर की जांच में खुली पोल
राजेश सिन्हा,8319654988
मनेंद्रगढ़, एमसीबी। ब्लॉक कांग्रेस कमेटी मनेंद्रगढ़ शहर के अध्यक्ष सौरव मिश्रा द्वारा मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के अंतर्गत वितरित कथित नकली मंगलसूत्र की जांच एवं दोषियों पर कार्रवाई की मांग को लेकर की गई शिकायत अब जिला प्रशासन की जांच में प्रथम दृष्टया सही पाई गई है। जिला कलेक्टर मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर द्वारा गठित जांच समिति ने अपनी जांच रिपोर्ट में शिकायत के लगभग सभी तथ्यों की पुष्टि करते हुए संबंधित अधिकारी के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा की है। दूसरी ओर, जांच रिपोर्ट आने से पहले ही महिला एवं बाल विकास विभाग के संचालक द्वारा प्रेस विज्ञप्ति जारी कर पूरे मामले को निराधार बताने का प्रयास किया गया, जिससे अब विभाग की कार्यप्रणाली और उसकी मंशा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
ब्लॉक कांग्रेस कमेटी मनेंद्रगढ़ शहर के अध्यक्ष सौरव मिश्रा ने बताया कि उन्होंने दिनांक 18 जून 2026 को जिला कलेक्टर को लिखित शिकायत प्रस्तुत कर मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के अंतर्गत 10 फरवरी 2026 को विकासखंड खड़गवां के चनवारीडांड स्थित महामाया मंदिर परिसर में आयोजित सामूहिक विवाह कार्यक्रम में वितरित मंगलसूत्रों की गुणवत्ता की निष्पक्ष जांच की मांग की थी। शिकायत में उल्लेख किया गया था कि इस कार्यक्रम में विभागीय अभिलेखों के अनुसार कुल 184 जोड़ों का विवाह संपन्न कराया गया था। समारोह में क्षेत्रीय विधायक एवं प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित थे। बाद में नवविवाहित महिलाओं द्वारा वीडियो जारी कर आरोप लगाया गया कि उन्हें चांदी के नाम पर गिलेट अथवा निम्न गुणवत्ता वाले मंगलसूत्र वितरित किए गए हैं। शिकायत में कहा गया था कि यदि यह आरोप सत्य हैं तो यह शासन की महत्वाकांक्षी योजना में गंभीर वित्तीय अनियमितता, नवविवाहित महिलाओं के सम्मान के साथ खिलवाड़ तथा शासकीय धन के दुरुपयोग का मामला है।
शिकायत प्राप्त होने के बाद जिला कलेक्टर ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच समिति का गठन किया। लेकिन आश्चर्यजनक रूप से जांच समिति की रिपोर्ट आने से पहले ही महिला एवं बाल विकास विभाग के संचालक द्वारा प्रेस विज्ञप्ति जारी कर पूरे मामले को निराधार बताया गया। प्रेस विज्ञप्ति में दावा किया गया कि योजना में किसी प्रकार की अनियमितता नहीं हुई है तथा सोशल मीडिया पर लगाए गए आरोप तथ्यहीन हैं। इससे यह गंभीर प्रश्न खड़ा होता है कि जब जिला प्रशासन द्वारा जांच जारी थी, तब महिला बाल विकास विभाग ने बिना कोई जांच कराए किस आधार पर पहले ही पूरे मामले में क्लीन चिट दे दी? क्या यह महिला एवं बाल विकास मंत्री की छवि चमकाने और विभागीय अधिकारियों को बचाने का प्रयास नहीं था?
इसके विपरीत, 19 जून 2026 को जिला कलेक्टर द्वारा महिला एवं बाल विकास विभाग के संचालक को भेजे गए पत्र में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया कि “जांच समिति द्वारा प्रस्तुत जांच प्रतिवेदन अनुसार प्रथम दृष्टया शिकायत सही पाई गई है।” कलेक्टर ने जांच प्रतिवेदन एवं संलग्न दस्तावेज अग्रिम कार्रवाई हेतु संचालक को भेज दिए।
जांच समिति की रिपोर्ट में कई गंभीर अनियमितताओं का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के लिए वित्तीय वर्ष 2025-26 में कुल 92 लाख रुपये का आवंटन प्राप्त हुआ था। शासन के प्रावधानों के अनुसार प्रत्येक हितग्राही के लिए ₹50,000 निर्धारित थे, जिसमें ₹35,000 सीधे हितग्राही के बैंक खाते में तथा शेष राशि विवाह आयोजन एवं उपहार सामग्री पर व्यय की जानी थी। उपहार सामग्री के लिए प्रति जोड़ा ₹7,000 का प्रावधान था, जिसमें चांदी का मंगलसूत्र भी शामिल था।
जांच में पाया गया कि जिला स्तरीय क्रय समिति ने स्पष्ट रूप से चांदी का मंगलसूत्र खरीदे जाने की अनुशंसा की थी तथा यह भी निर्णय लिया था कि सामग्री का क्रय प्राथमिकता से GeM पोर्टल के माध्यम से किया जाए। यदि कोई सामग्री GeM पर उपलब्ध न हो तो भंडार क्रय नियमों के अनुसार नियमानुसार खरीद की जाए। इसके बावजूद जिला कार्यक्रम अधिकारी द्वारा समिति की अनुशंसा के विपरीत कार्यवाही की गई।
रिपोर्ट में कहा गया है कि सीमित निविदा के माध्यम से सामग्री खरीदी गई, लेकिन संबंधित फर्मों से कोटेशन प्राप्त करने की प्रक्रिया में निर्धारित नियमों का पालन नहीं किया गया। क्रय समिति के सदस्यों से कोटेशन पर अनुमोदन एवं हस्ताक्षर नहीं लिए गए। सामग्री का भौतिक सत्यापन भी नहीं कराया गया और भुगतान से पूर्व आवश्यक प्रशासनिक अनुमोदन भी प्राप्त नहीं किए गए। जांच समिति ने माना कि भंडार क्रय नियम, वित्तीय अधिकार पुस्तिका तथा निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।
जांच में यह तथ्य भी सामने आया कि गुणवत्ता संबंधी शिकायत मिलने के बाद संबंधित फर्म के भुगतान से प्रति मंगलसूत्र ₹1,000 की कटौती की गई तथा कुल ₹1,84,000 हितग्राही महिलाओं के खातों में अंतरित किए गए। इसके बाद संबंधित फर्म को लगभग ₹12.85 लाख का भुगतान किया गया। यदि विभाग के अनुसार शिकायत पूरी तरह निराधार थी, तो फिर भुगतान में कटौती कर हितग्राहियों के खातों में राशि जमा कराने की आवश्यकता क्यों पड़ी? यह स्वयं विभाग की प्रारंभिक प्रेस विज्ञप्ति पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
जांच समिति ने अपने निष्कर्ष में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया है कि जिला कार्यक्रम अधिकारी श्री आदित्य शर्मा द्वारा क्रय समिति की अनुशंसाओं की अवहेलना की गई, चांदी के मंगलसूत्र के स्थान पर अन्य मंगलसूत्र वितरित किए गए, खरीद प्रक्रिया में नियमों का पालन नहीं किया गया तथा बिना आवश्यक अनुमोदन के भुगतान की कार्यवाही की गई। जांच समिति ने श्री आदित्य शर्मा के विरुद्ध नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा भी की है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि सौरव मिश्रा द्वारा की गई लिखित शिकायत के लगभग सभी तथ्यों की पुष्टि होती है और शिकायत सही प्रतीत होती है।
सौरव मिश्रा ने कहा कि अब सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि जब जिला कलेक्टर द्वारा गठित जांच समिति ने शिकायत को प्रथम दृष्टया सही पाया है, तब महिला एवं बाल विकास विभाग के संचालक द्वारा जांच पूरी होने से पहले जारी की गई प्रेस विज्ञप्ति की जिम्मेदारी कौन तय करेगा? आखिर किसके निर्देश पर जनता को गुमराह करने का प्रयास किया गया? यदि कलेक्टर निष्पक्ष जांच नहीं कराते, तो यह पूरा मामला दब सकता था।
सौरव मिश्रा ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर दोषी अधिकारियों के विरुद्ध तत्काल कठोर कार्रवाई की जाए। साथ ही महिला एवं बाल विकास विभाग के संचालक द्वारा जांच पूरी होने से पहले जारी की गई प्रेस विज्ञप्ति की भी जांच कर यह स्पष्ट किया जाए कि क्या वह प्रेस विज्ञप्ति महिला एवं बाल विकास मंत्री की छवि चमकाने तथा विभागीय अधिकारियों को बचाने के उद्देश्य से जारी की गई थी। शासन की योजनाओं में पारदर्शिता बनाए रखने, नवविवाहित महिलाओं के सम्मान की रक्षा करने और जनता का विश्वास कायम रखने के लिए इस पूरे प्रकरण में निष्पक्ष एवं कठोर कार्रवाई अत्यंत आवश्यक है।
पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष प्रभा पटेल ने कहा कि यह मामला केवल खरीद प्रक्रिया में अनियमितता का नहीं, बल्कि गरीब बेटियों के सम्मान और शासन की विश्वसनीयता से जुड़ा है। दोषियों पर कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।
जिला कांग्रेस कमेटी की महामंत्री पूनम सिंह ने कहा कि जांच रिपोर्ट ने शिकायत को सही साबित कर दिया है। अब सरकार को दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई कर जवाबदेही तय करनी चाहिए।
पूर्व जिला महिला कांग्रेस अध्यक्ष रूमा चटर्जी ने कहा कि मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना गरीब परिवारों की बेटियों के सम्मान से जुड़ी योजना है। इसमें हुई किसी भी अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
पार्षद किरण कुजूर ने कहा कि जब जांच समिति ने शिकायत को सही पाया है, तो सरकार को बिना विलंब दोषियों पर कार्रवाई करनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
पूर्व पार्षद हमीदा खातून ने कहा कि जांच पूरी होने से पहले विभाग द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जनता को गुमराह करने वालों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
पूर्व महिला कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष शोभना वर्मा ने कहा कि यह मामला नवविवाहित महिलाओं के सम्मान और शासन की पारदर्शिता से जुड़ा है। दोषियों को किसी भी कीमत पर बचाया नहीं जाना चाहिए।
खबर जागरण न्यूज (देश की आवाज) एमसीबी
