आस्था पर चला न्यायालय का हथौड़ा? चित्रगुप्त मंदिर तोड़ने की तैयारी से भड़का समाज
प्रशासन पर साजिश के आरोप, विरोध की चेतावनी — “मंदिर तोड़े बिना भी हो सकता है अस्पताल विस्तार”
स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल का भी पत्र नहीं आया काम
एमसीबी।जिले में स्थित चित्रगुप्त मंदिर को हटाने की संभावित कार्रवाई को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। प्रशासन द्वारा अस्पताल के विस्तार के नाम पर मंदिर को तोड़ने की तैयारी किए जाने के आरोपों ने स्थानीय लोगों और चित्रांश समाज में आक्रोश पैदा कर दिया है। समाज के लोगों का कहना है कि यह केवल विकास का मुद्दा नहीं, बल्कि आस्था पर सीधा प्रहार है।
स्थानीय नागरिकों के अनुसार, चार जिलों में यह इकलौता चित्रगुप्त मंदिर है, जहां प्रतिदिन सैकड़ों श्रद्धालु पूजा-अर्चना करने पहुंचते हैं। मंदिर में भगवान चित्रगुप्त के साथ मां दुर्गा और गणेश जी की प्रतिमाएं भी स्थापित हैं, जिससे इसकी धार्मिक महत्ता और बढ़ जाती है।
समाज के प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि प्रशासन पहले से ही मंदिर को हटाने की योजना बना रहा था और अब न्यायालय के आदेश का हवाला देकर इसे अंजाम देने की कोशिश की जा रही है। लोगों का कहना है कि यदि वास्तव में अस्पताल का विस्तार करना है, तो वैकल्पिक स्थान पर भी यह संभव है, मंदिर को तोड़ना जरूरी नहीं है।
इस मुद्दे पर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी तेज हो गए हैं। कुछ लोगों ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि “कथनी और करनी में अंतर” साफ दिखाई दे रहा है, जहां एक ओर धर्म और आस्था की बात की जाती है, वहीं दूसरी ओर मंदिर तोड़ने की कार्रवाई की जा रही है।
खास बात यह है कि प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने भी पत्र लिखकर प्रशासन से मंदिर को नहीं तोड़ने का आग्रह किया था। इसके बावजूद प्रशासन द्वारा कार्रवाई की तैयारी किए जाने की खबरों ने लोगों की नाराजगी और बढ़ा दी है।
चित्रांश समाज और स्थानीय नागरिकों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि वे मंदिर तोड़ने का विरोध करेंगे। उनका कहना है कि यदि एसडीएम न्यायालय से राहत नहीं मिली, तो वे उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे।
फिलहाल पूरे मामले ने तूल पकड़ लिया है और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

