झीरम नरसंहार: NIA कोर्ट के फैसले पर कांग्रेस ने उठाए सवाल, कहा-“पूरा सच अब भी सामने नहीं आया”
कांग्रेस ने फैसले का किया सम्मान, लेकिन जांच को बताया आधा-अधूरा; बड़े नक्सली नेताओं के नाम चार्जशीट से हटाए जाने पर उठाए सवाल
रायपुर। झीरम घाटी नरसंहार मामले में एनआईए कोर्ट के फैसले के बाद कांग्रेस ने जांच और फैसले को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस ने अदालत के फैसले का सम्मान करते हुए इसे “आधा-अधूरा न्याय” बताया है। कांग्रेस का कहना है कि अदालत ने एनआईए द्वारा प्रस्तुत तथ्यों के आधार पर फैसला सुनाया है, लेकिन झीरम हमले की पूरी साजिश का पर्दाफाश अब भी नहीं हुआ है।
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि एनआईए की जांच शुरुआत से ही दिशाहीन रही और घटना के राजनीतिक षड्यंत्र के पहलू की पर्याप्त जांच नहीं की गई। कांग्रेस के मुताबिक, जिन आरोपियों को दोषी ठहराया गया है, वे छोटे स्तर के नक्सली थे, जबकि इतनी बड़ी घटना बड़े नक्सली नेताओं की भूमिका के बिना संभव नहीं थी।
बड़े नक्सली नेताओं के नाम हटाने पर सवाल
कांग्रेस ने दावा किया कि एनआईए की शुरुआती एफआईआर में गणपति उर्फ मुपल्ला लक्ष्मण राव और रमन्ना सहित कई प्रमुख नक्सली नेताओं के नाम शामिल थे। कांग्रेस के अनुसार, मार्च 2014 में इन फरार आरोपियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट भी जारी हुए थे, लेकिन बाद की चार्जशीट से कई नाम हटा दिए गए।
कांग्रेस ने सवाल किया कि यदि ये लोग शुरुआती जांच में आरोपी और फरार घोषित किए गए थे, तो बाद में इनके नाम चार्जशीट से क्यों हटाए गए?
सरेंडर करने वाले नक्सलियों से पूछताछ पर सवाल
कांग्रेस ने झीरम मामले में वांछित रहे और बाद में आत्मसमर्पण करने वाले नक्सली नेताओं से पूछताछ को लेकर भी सवाल उठाए हैं। कांग्रेस ने पूछा कि आत्मसमर्पण करने वाले ऐसे नक्सलियों से एनआईए ने कब पूछताछ की और क्या उन्हें झीरम मामले में निर्दोष मान लिया गया?
कांग्रेस ने यह भी सवाल उठाया कि हमले के दौरान घायल और जीवित बचे प्रत्यक्षदर्शियों के बयान कितनी संख्या में दर्ज किए गए। साथ ही कांग्रेस ने दावा किया कि कई प्रभावित लोग शपथपत्र के साथ जांच एजेंसियों के सामने पहुंचे, लेकिन उनके बयानों को जांच में शामिल नहीं किया गया।
परिवर्तन यात्रा की सुरक्षा और मार्ग बदलने पर भी सवाल
कांग्रेस ने झीरम कांड को लेकर कई बड़े सवाल सामने रखे हैं। पार्टी ने पूछा कि परिवर्तन यात्रा की सुरक्षा क्यों हटाई गई थी? यात्रा का मार्ग किसने और क्यों बदला? हमले की योजना किसने बनाई थी?
कांग्रेस ने यह भी सवाल उठाया कि तत्कालीन मुख्यमंत्री, गृहमंत्री, मुख्य सचिव, डीजीपी और नक्सल ऑपरेशन से जुड़े अधिकारियों से एनआईए ने कब पूछताछ की।
कांग्रेस का भाजपा पर भी हमला
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि भाजपा की तत्कालीन सरकार शुरू से ही झीरम मामले की जांच को प्रभावित करने का प्रयास करती रही। कांग्रेस ने न्यायिक जांच आयोग, एसआईटी और एनआईए की जांच से जुड़े पुराने घटनाक्रम का हवाला देते हुए भाजपा पर झीरम का सच सामने नहीं आने देने का आरोप लगाया।
कांग्रेस का कहना है कि झीरम नरसंहार की पूरी साजिश, उसके पीछे की भूमिका और बड़े नक्सली नेताओं की कथित संलिप्तता जैसे सवालों के जवाब अभी भी सामने आना बाकी हैं।
हालांकि, कांग्रेस द्वारा लगाए गए इन आरोपों पर संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया सामने आने के बाद खबर को और विस्तार दिया जा सकता है।
राजेश सिन्हा,8319654988

