शासकीय विवेकानंद स्नातकोत्तर महाविद्यालय में राजभाषा हिंदी पखवाड़े के अंतर्गत व्याख्यानमाला आयोजित
मनेंद्रगढ़,एमसीबी।शासकीय विवेकानंद स्नातकोत्तर महाविद्यालय, मनेन्द्रगढ़ में राजभाषा हिंदी दिवस एवं पखवाड़े के अंतर्गत हिंदी विभाग के तत्वावधान में ’‘हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार एवं विकास में हमारी भूमिका’’ विषय पर व्याख्यानमाला का आयोजन किया गया। महाविद्यालय की प्राचार्य ’प्रो. श्राबनी चक्रवर्ती’ के मार्गदर्शन एवं संरक्षण में आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता भी उन्होंने की। कार्यक्रम में प्राध्यापकों एवं विद्यार्थियों ने हिंदी भाषा के वर्तमान स्वरूप, उसकी उपयोगिता तथा उसके व्यापक प्रचार-प्रसार में अपनी भूमिका पर विचार व्यक्त किए।
कार्यक्रम के प्रारंभ में हिंदी विभाग की ओर से उपस्थित प्राध्यापकों एवं अतिथियों का पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत एवं अभिनंदन किया गया। इस अवसर पर प्राचार्य प्रो. श्राबनी चक्रवर्ती ने सभी को राजभाषा हिंदी दिवस एवं पखवाड़े की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि हिंदी केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी संवेदना, संस्कृति, विचार और जीवन-दृष्टि की सशक्त अभिव्यक्ति है। हिंदी ने ज्ञान-विज्ञान के साथ-साथ प्रेम, सौंदर्य, भक्ति एवं मानवीय संवेदनाओं को अभिव्यक्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
प्राचार्य ने अपने संबोधन में कहा कि वे स्वयं अंग्रेजी भाषा की प्राध्यापक हैं, किंतु अपनी राजभाषा हिंदी के प्रति उनका विशेष अनुराग और सम्मान है। उन्होंने कहा कि अन्य भाषाएं ज्ञान के व्यापक संसार से जोड़ती हैं और उनका अध्ययन आवश्यक है, लेकिन अपनी भाषा का ज्ञान और उसके प्रति सम्मान आत्मगौरव एवं आत्मसम्मान से जुड़ा विषय है। उन्होंने हिंदी साहित्य के अनेक साहित्यकारों का स्मरण करते हुए हिंदी भाषा और साहित्य के विकास में उनके अवदान को रेखांकित किया। इस अवसर पर उन्होंने अपनी स्वरचित हिंदी कविता का भावपूर्ण वाचन भी किया, जिसे उपस्थितजनों ने सराहा।
व्याख्यानमाला में ’डॉ. सरोज बाला श्याग बिश्नोई, डॉ. रश्मि तिवारी, डॉ. प्रभा राज एवं श्रीमती स्मृति अग्रवाल’ ने हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार एवं विकास के विभिन्न आयामों पर अपने विचार व्यक्त किए। वक्ताओं ने कहा कि किसी भी भाषा का विकास केवल संस्थागत प्रयासों से संभव नहीं है; उसके लिए समाज और विशेष रूप से युवा पीढ़ी की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने हिंदी को दैनिक व्यवहार, अध्ययन-अध्यापन, लेखन तथा डिजिटल माध्यमों में अधिकाधिक प्रयोग करने पर बल दिया।
इस अवसर पर ’एम.ए. प्रथम सेमेस्टर की छात्रा मीनाक्षी’ एवं ’बी.एससी. पंचम सेमेस्टर के छात्र छबी सोनकर’ ने भी हिंदी भाषा के विकास और वर्तमान समय में उसकी प्रासंगिकता पर अपने विचार साझा किए। विद्यार्थियों की सहभागिता ने कार्यक्रम को संवादात्मक एवं जीवंत स्वरूप प्रदान किया।
वक्ताओं ने कहा कि डिजिटल युग में हिंदी के सामने नई संभावनाओं के द्वार खुले हैं। इंटरनेट, सोशल मीडिया, डिजिटल शिक्षा और तकनीकी माध्यमों में हिंदी का बढ़ता प्रयोग उसकी व्यापक पहुंच को रेखांकित करता है। आवश्यकता है कि हिंदी को केवल विशेष दिवसों और आयोजनों तक सीमित न रखकर व्यवहार, अध्ययन और ज्ञान-विमर्श की भाषा के रूप में निरंतर प्रयोग किया जाए।
कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्राध्यापक डॉ अरुणिमा दत्ता, भीमसेन भगत डॉ. नसीमा बेगम अंसारी, सुनील कुमार गुप्ता, कमलेश पटेल, सुशील कुमार छात्रे, अतिथि व्याख्याता गण डॉ. रेणु प्रजापति, डॉ. रामजी गर्ग, रामनिवास गुप्ता, पुष्पराज सिंह, अल्पना खलखो, अभिषेक सिंह, प्रकाशदास मानिकपुरी, कर्मचारीगण मनीष कुमार श्रीवास्तव, बी.एल.शुक्ला, मीना त्रिपाठी, सुनित जॉनसन बाड़ा, पारूल पटेल, कमलू सिंह मार्को, अवंतिका, साधना बुनकर, हेमन्त सिंह, तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। हिंदी पखवाड़े के अंतर्गत आयोजित यह व्याख्यानमाला हिंदी के प्रति सम्मान, आत्मीयता एवं जिम्मेदारी की भावना को सुदृढ़ करने के साथ हिंदी के प्रचार-प्रसार में सामूहिक भागीदारी का संदेश देने में सफल रही। कार्यक्रम का सफल संचालन हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ सुशील कुमार तिवारी एवं आभार प्रदर्शन डॉ रिंकी तिवारी ने किया।
राजेश सिन्हा,8319654988

