एमसीबी में सवर्ण समाज फोरम की बैठक, यूजीसी इक्विटी नियमों में संशोधन और सवर्ण आयोग के गठन की मांग
मनेन्द्रगढ़। एमसीबी जिला मुख्यालय मनेन्द्रगढ़ के अहिंसा भवन में सवर्ण समाज फोरम की आवश्यक बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता ब्राह्मण समाज के अध्यक्ष विनोद तिवारी ने की। बैठक में विभिन्न समाजों के प्रतिनिधियों एवं बड़ी संख्या में समाज के लोग उपस्थित रहे।
बैठक में सवर्ण समाज से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा करते हुए केंद्र सरकार के समक्ष मांगें रखने तथा महामहिम राष्ट्रपति के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपने पर विचार-विमर्श किया गया। बैठक में मुख्य रूप से यूजीसी के उच्च शिक्षा में समानता से संबंधित नियमों, सवर्ण आयोग के गठन, आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा तथा एससी-एसटी कानून के तहत मुआवजा व्यवस्था सहित विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई।
सवर्ण समाज फोरम के सदस्यों ने कहा कि समाज के अनुसार सवर्ण वर्ग की समस्याओं और हितों के लिए भी एक प्रभावी संवैधानिक/वैधानिक मंच होना चाहिए। इसी उद्देश्य से अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़ा वर्ग आयोग की तर्ज पर सवर्ण आयोग के गठन की मांग रखी गई।
यूजीसी नियमों को लेकर आपत्ति, विनोद तिवारी ने कहा कि यूजीसी को लेकर जो भ्रांति फैलाई जा रही है की यूजीसी एक प्रस्ताव मात्र है, यह सरासर सफेद झूठ है 13 जनवरी 2026 को भारत के राज्य पत्र में यूजीसी की गाइडलाइन जारी कर दी गई और जारी करते ही यह पूरे देश में लागू हो गया है यह कानून बनने के बाद ही सुप्रीम कोर्ट उस पर एक्शन ली है और अंतरिम रोक लगाई है इसलिए यह कहना गलत है कि यह प्रस्ताव मात्र है।
बैठक में यूजीसी के Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026 को लेकर भी चर्चा हुई। फोरम ने आरोप लगाया कि नए प्रावधानों में सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों के प्रतिनिधित्व और शिकायत निवारण की प्रक्रिया को लेकर चिंताएं हैं।
फोरम ने मांग की कि शिकायतों पर किसी बड़ी कार्रवाई से पहले प्रारंभिक जांच की व्यवस्था हो, शिकायत झूठी पाए जाने पर कार्रवाई का प्रावधान किया जाए तथा सभी वर्गों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाए। साथ ही रैगिंग के कारण भी कल कॉलेज में भेदभाव हुआ करते हैं उसे भी शामिल किया जाना चाहिए जो इस बिल में शामिल नहीं है।
आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा की मांग
बैठक में फोरम ने कहा कि वह एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षण व्यवस्था का विरोध नहीं करता, लेकिन आरक्षण के लाभ वास्तविक रूप से जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाने के लिए व्यवस्था की समीक्षा की जानी चाहिए। वक्ताओं ने क्रीमी लेयर और आर्थिक स्थिति के आधार पर आरक्षण व्यवस्था में सुधार की मांग रखी।
फोरम ने यह भी मांग की कि आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को उनकी जाति या वर्ग से अलग हटकर अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में भी विचार किया जाए।
एससी-एसटी मुआवजा व्यवस्था पर भी उठाए सवाल
बैठक में एससी-एसटी वर्ग से संबंधित मामलों में दिए जाने वाले मुआवजे की व्यवस्था को लेकर भी फोरम ने अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं। सदस्यों ने मांग की कि मुआवजा देने से पहले मामले की जांच और न्यायिक प्रक्रिया को प्राथमिकता दी जाए तथा झूठी शिकायत साबित होने की स्थिति में शिकायतकर्ता के खिलाफ भी कार्रवाई का प्रावधान होना चाहिए। वर्तमान समय में एक्ट्रोसिटी एक्ट लगाना स्टेंट मनी प्राप्त करने जैसा हो गया है, यानी कि जब भी पैसे की जरूरत हो किसी भी व्यक्ति के ऊपर एक्ट्रोसिटी एक्ट लगा दें और पैसा प्राप्त कर ले फोरम का कहना था कि कानून का उद्देश्य वास्तविक पीड़ितों को संरक्षण देना है, लेकिन किसी भी कानून का दुरुपयोग न हो, इसके लिए जांच और जवाबदेही की स्पष्ट व्यवस्था जरूरी है।
बैठक के अंत में फोरम ने सरकार से समाज के सभी वर्गों के बीच समानता, समरसता और न्याय की भावना को मजबूत करने की सदिशा में आवश्यक कदम उठाने की मांग की। तिवारी जी ने बताया कि भाजपा के पूर्व नेता सुदर्शन अग्रवाल जी ने भी फोरम की मांगों का समर्थन किया है और पूरा सहयोग देने की बात कही है और साथ ही साथ सिख समाज ने भी फोरम के सभी बातों का समर्थन किया है और पूरा सहयोग का वादा किया है
बैठक में विनोद तिवारी, सूरज भान सिंह, पंकज जैन, सी.एम. तिवारी, निशांत श्रीवास्तव, रुपेश श्रीवास्तव, राजेश सिन्हा, महेंद्र प्रताप सिंह और शिवेंद्र सिंह सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।
राजेश सिन्हा,8319654988

