“संबोधन साहित्य कला विकास संस्थान का शानदार आयोजन”
मेरी मां मैं तेरी बेटी, मुझको दुनिया में आने दे
फर्क नहीं बेटा बेटी में , दुनिया को समझाने दे
(हिंदी दिवस पखवाड़े में आंचलिक कवि सम्मेलन का आयोजन)
एमसीबी।मनेन्द्रगढ़, नगर पालिका पार्क मनेन्द्रगढ़ में हिंदी दिवस पखवाड़े के अवसर पर संबोधन साहित्य कला विकास संस्थान मनेन्द्रगढ़ द्वारा आंचलिक कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया जिसमें अंचल के रचनाकारों में श्रीमती ज्योति मजूमदार के गीत बेटी की पंक्तियों ने पूरे माहौल को एक अनुत्तरित प्रश्न में बांध दिया। गीत की पंक्तियां देखिए –
मेरी मां मैं तेरी बेटी, मुझको दुनिया में आने दे
फर्क नहीं बेटा बेटी में ,दुनिया को समझाने दे
माननीय मुख्य अतिथि राशिद कुरैशी एवं अनिल जैन की अध्यक्षता में आयोजित इस आंचलित कवि सम्मेलन में जब संचालक राजेश जैन ने पत्रकार रामचरित द्विवेदी को आमंत्रित किया तब उन्होंने अपने गीत में बेटी की भावनाओं को प्रस्तुत करते हुए श्रोताओं को भावविभोर कर दिया पंक्तियां देखिए “तू अचार छोड़ने की बात मत कर लाडो, तू कहे तो मैं अचार की दुकान खोल दूं” , अंचल के वरिष्ठ साहित्यकार बीरेन्द्र श्रीवास्तव ने अपने गीत “हम जहां से चले तुम वही हो खड़े, थोड़ी कोशिश करोगे तो बढ़ जाओगे” सीढ़ियां है बनी सब तुम्हारे लिए, होगा खुद पर भरोसा तो चढ़ जाओगे,” गीत प्रस्तुति ने उपस्थित श्रोताओं की वाह-वाही प्राप्त की। वरिष्ठ रचनाकार गिरीश तिवारी के हिंदी पर चिंता व्यक्त करते “हिंदी का अभिवादन करना जब चाहे तो, हाथ हमारे बौने क्यों हो जाते हैं गीत पर लोगों की जबरदस्त तालियां बटोरी। पहली बार मंच पर प्रस्तुत जसपाल सिंह कालरा ने अपनी कविता में हिंदी की वर्तमान स्थिति पर चर्चा करते हुए कविता मेरी हिन्दी पढ़ी “टूटी-फूटी ही सही हर प्रांत में चल जाती है, जिस जुबान के संग चले उसमें ही ढल जाती है” कवियत्रि वीरांगना श्रीवास्तव की कविताओं ने पूरे मंच को बांध दिया, वहीं वरिष्ठ साहित्यकार सतीश उपाध्याय, संगीता तिवारी एवं विजय गुप्ता के गीतों ने दर्शकों को देर रात तक बांधे रखा।
विकास के नए क्षेत्र में हिंदी विषय पर आयोजित संगोष्ठी में साहित्यकारों ने अपने विचार रखें जिसमें शिक्षा जगत से जुड़े संजय सेंगर एवं जसपाल सिंह ने चर्चा को आगे बढ़ाते हुए कहा कि विद्यालय किसी भी माध्यम का हो लेकिन हिन्दी ऐसी भाषा है जो हमें सोच विचार की शक्ति प्रदान करती है, इसलिए हर भारतीय को हिन्दी में पारंगत होना चाहिए। केंद्र सरकार द्वारा वर्तमान में पारित देश के सभी विद्यालय में तीन भाषा पढ़ाने की पद्धति हिंदी को आगे बढ़ाने में एक सार्थक कदम साबित होगी, ऐसा मेरा विचार है। अंचल के वरिष्ठ लेखक बीरेन्द्र कुमार श्रीवास्तव ने हिन्दी विकास पर अपने विचार रखते हुए कहा कि 150 करोड़ की जनसंख्या वाले भारत देश के सभी राज्य के नागरिक जिस दिन मन से हिंदी को राष्ट्र की संपर्क भाषा के रूप में स्वीकार कर लेंगे उस दिन हिंदी को विश्व की प्रथम भाषा बनने में ज्यादा समय नहीं लगेगा। योग शिक्षक एवं वरिष्ठ साहित्यकार सतीश उपाध्याय ने कहा कि सद्भावना दर्पण एवं समकालीन भारतीय साहित्य जैसी कई पत्र पत्रिकाएं आज वैश्विक भाषाओं के हिंदी अनुवाद हमें पत्रिका के माध्यम से उपलब्ध करा रही है जो हिंदी को दूसरे भाषाई नागरिकों तक पहुंचाने का अच्छा प्रयास है। इस तरह हिंदी को नई वैश्विक पहचान मिलेगी।
देर शाम तक चलते इस कार्यक्रम में साहित्यकार विजय गुप्ता, गिरीश तिवारी, श्रीमती वीरांगना श्रीवास्तव, संगीता तिवारी, सतीश उपाध्याय, जसपाल सिंह कालरा, श्रीमति ज्योति मजूमदार, पुष्कर लाल तिवारी, के गीतों का उपस्थित जन समुदाय ने पूरा आनंद लिया। अधिवक्ता श्याम बिहारी रैकवार, संजय सेंगर , राशिद कुरैशी, अनिल कुमार जैन,संबोधन के वरिष्ठ सदस्य निरंजन मित्तल, टी विजय गोपाल राव, एवं वरिष्ठ साहित्यकार बीरेन्द्र श्रीवास्तव की उपस्थिति ने कार्यक्रम को ऊंचाइयां प्रदान की ।
राजेश सिन्हा,8319654988

