खदान की अंधेरी गहराइयों से जंग: एमसीबी में शुरू हुआ एसईसीएल की 11 ‘रेस्क्यू टीम ‘ का महासंग्राम
मनेंद्रगढ़ के खान बचाव केंद्र में शुरू हुई दो दिवसीय ‘इंटर एरिया रेस्क्यू प्रतियोगिता’ – मौत के मुंह से जिंदगी खींच लाने का हुनर दिखा रहे हैं एसईसीएल के 11 धुरंधर बचाव दल
मनेंद्रगढ़ (एमसीबी): कोयले की काली परतों के नीचे जब कभी मौत और आपदा सन्नाटा चीरकर सामने आती है, तो उम्मीद की सिर्फ एक ही किरण बचती है—’रेस्क्यू टीम’। जान की बाजी लगाकर दूसरों की जिंदगी बचाने वाले इन जांबाजों का महासंग्राम आज से मनेंद्रगढ़ स्थित ऐतिहासिक खान बचाव केंद्र (Mines Rescue Station) में शुरू हो चुका है। मौका है दो दिवसीय प्रतिष्ठित ‘इंटर एरिया रेस्क्यू प्रतियोगिता’ का, जहां एसईसीएल (SECL) की 11 सबसे बेहतरीन और फुर्तीली टीमें तथा एक मिला बचाव टीम अपनी तकनीकी दक्षता और अदम्य साहस का लोहा मनवाने उतरी हैं।
कार्यक्रम का आगाज पूरी भव्यता और देशभक्ति के माहौल में हुआ। मां काली के दरबार में दीप प्रज्वलन के साथ इस महासंग्राम का शंखनाद किया गया। इसके बाद मुख्य अतिथि खान बचाव उपनिदेशक (बिलासपुर) इरफान अहमद अंसारी ने खान सुरक्षा महानिदेशालय (DGMS) का झंडा फहराया, जबकि हसदेव क्षेत्र के महाप्रबंधक मनोज बिश्नोई ने कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) और रेस्क्यू ऑर्गेनाइजेशन के ध्वज को आसमान में बुलंद किया।
इसके बाद गूंजे सीआईएल कॉरपोरेट सॉन्ग और डीजीएमएस सॉन्ग ने पूरे परिसर में ऐसा जोश भरा कि वहां मौजूद हर शख्स का सीना गर्व से चौड़ा हो गया। मुख्य अतिथि ने लॉटरी पद्धति से सभी 11 टीमों के प्रदर्शन का क्रम तय किया, जिसके बाद रेस्क्यू कर्मियों के अनुशासित और कदमों की ताल से गूंजते ‘मार्च पास्ट’ ने सबका दिल जीत लिया।
भूमिगत खदानों की अंधेरी सुरंगों में किसी भी अनहोनी से निपटने के लिए तैयार एसईसीएल की 11 दिग्गज टीमें इस प्रतियोगिता में एक-दूसरे को कड़ी टक्कर दे रही हैं। इनमें—
• चिरमिरी, कोरबा, कुसमुंडा, दीपिका, गेवरा, रायगढ़, सोहागपुर, (विशेष रूप से आकर्षण का केंद्र बनी महिलाओं की एसईसीएल टीम), जोहिला, जमुना-कोतमा, हसदेव एरिया, विश्रामपुर, बैकुंठपुर और भटगांव की टीमें शामिल हैं।
इस प्रतियोगिता का सबसे रोमांचक और कठिन हिस्सा हल्दीबाड़ी खदान में होने वाला मॉक ड्रिल है। यहां कागजी ज्ञान नहीं, बल्कि जमीन पर असली आपदा जैसी कृत्रिम परिस्थितियां पैदा की जाएंगी। जहरीली गैसों का रिसाव, अचानक ढहती छतें और मलबे में फंसे श्रमिक—इन परिस्थितियों के बीच टीमों को परखा जाएगा कि वे:
1. कितनी तेजी से निर्णय लेती हैं?
2. आधुनिक रेस्क्यू उपकरणों का इस्तेमाल कितनी सटीकता से करती हैं?
3. जान जोखिम में डालकर साथी को सुरक्षित बाहर कैसे निकालती हैं?
4. प्राथमिक चिकित्सा (First Aid) में उनका हाथ कितना साफ है?
हसदेव एरिया के जीएम मनोज विश्नोई ने टीमों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा, “खदानों में पसीना बहाने वाले हमारे श्रमिक ही हमारी सबसे बड़ी ताकत हैं, उनकी सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।”
आयोजकों का मानना है कि यह सिर्फ एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि मॉक ड्रिल के जरिए खुद को निखारने का मौका है। मकसद साफ है—भविष्य में अगर कोई अनहोनी हो, तो ये जांबाज ‘शून्य-क्षति’ (Zero Harm) के लक्ष्य को हासिल करते हुए हर कीमती जान बचा सकें।
फिलहाल, मनेंद्रगढ़ के खान बचाव केंद्र में सायरन की गूंज और रेस्क्यू हीरोज़ के हौसलों ने बता दिया है कि जब तक ये जांबाज मुस्तैद हैं, खदानों की हर गहराई सुरक्षित है।
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