संबोधन साहित्य संस्थान के स्वर्ण जयंती वर्ष का आगाज कविता और गीत उत्सव ने बिखेरे रंग
मनेन्द्रगढ़ :- संबोधन साहित्य एवं कला विकास मंच के स्वर्ण जयंती वर्ष के पहले आकाश में कविताओं और गीत उत्सव के रंग में लोगों को भाव विभोर कर दिया। विजय इंग्लिश मीडियम विद्यालय मनेन्द्रगढ़ के प्रांगण में आयोजित इस कार्यक्रम की शुरुआत संगोष्ठी एवं कविताओं से प्रारंभ हुई।
कविता और गीत उत्सव में रामचरित द्विवेदी के गीत ने संस्थान के इतिहास को शब्दों में बांध कर कुछ इस तरह प्रस्तुत किया और तालियां बटोरी-
छत्तीसगढ़ साहित्य जगत में नित्य नए सिद्धांत गढ़े
50 वर्ष में संबोधन ने गौरव के कई शिखर चढ़े
हर विकास की परिभाषा में बच्चों सा भोलापन है
अर्थशताब्दी उम्र में देखो पहुंच रहा संबोधन है
उनकी इस पंक्तियों ने पूरे मंच को तालियों की गड़गड़ाहट से बांध दिया। नई पीढ़ी के रचनाकारों में उज्जवल सिंह ने पूरे मंच को अपनी कविता के माध्यम से नए चिंतन से जोड़ दिया उनकी पंक्तियां देखिए
राम सरल है पर उनका पथ चलना बहुत कठिन है
जय श्री राम के नारे केवल क्या उनकी मंजिल है
मूर्ति बनाकर उनको हमने मंदिर में क्यों कैद किया
क्या उनके चरित्र का पालन इतना भी मुश्किल है
वृद्ध आश्रम पर श्रीमती ज्योति मजूमदार की कविता ने श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया उनकी पंक्तियां
जिसे बनाने डॉक्टर इंजीनियर मैने जीवन पूरा लगाया है
आज वही बेटा मां को वृद्ध आश्रम छोड़ के आया है
युवा पीढ़ी की इशिता सिंह की कविता ने दर्शकों को हिन्दी विकास के नए संदर्भों से जोड़ दिया उनकी कविता
भारत में जन्मी हिंदी आज विदेश में पल रही है
पर अपने ही देश में देखो लंगड़ा कर चल रही है पर श्रोताओं ने तालियों से भरपूर समर्थन दिया
अपनी हास्य व्यंग की रचना मेरी बीवी महान के साथ पुष्कर तिवारी ने मंच की वाहवाही लूटी वही श्याम सुंदर निगम की सजल की पंक्तियां –
रोके अपव्यय हम पानी का जीव जगत का जीवन जल है
संभव नहीं बिना जल पृथ्वी, जल ही पृथ्वी का आंचल है पंक्तियों का श्रोताओ ने तालियों से स्वागत किया।
श्रीमती वीरांगना श्रीवास्तव, संस्था अध्यक्ष अनिल जैन, बीरेंद्र कुमार श्रीवास्तव, कल्याण केसरी, तथा विजय गुप्ता के मोबाइल कविता श्रोताओं द्वारा सराही गई।
कार्यक्रम के दूसरे चरण में संगोष्ठी में संबोधन के संस्थापक सदस्य वीरेंद्र श्रीवास्तव ने कहा कि संबोधन साहित्य एवं कला विकास संस्थान अपने प्रारंभिक दौर में बैकुंठपुर से स्थापित होकर 1980 में मनेन्द्रगढ़ आ गई। 50 वर्षों की की अपनी यात्रा में हमें गर्व है कि हम 50 के हो गए। संबोधन साहित्य संस्थान की 50 वर्षों की यात्रा की कई तिथियां ऐसी रही है जो ऐतिहासिक प्रस्तों में आज शामिल हो चुकी है जिसमें छत्तीसगढ़ के एकमात्र 250 एकड़ का मलयागिरी चंदन वन, नर्मदा को बचाने हेतु बॉक्साइट के उत्खनन के लीज की समाप्ति, छत्तीसगढ़ में एकमात्र गोंडवाना मरीन फॉसिल पार्क का मनेन्द्रगढ़ में विकास और रेल यातायात को गति देने के प्रयास स्वरूप नागपुर- चिरमिरी की नई रेल लाइन की स्वीकृति जैसे कार्य में इस संस्था की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। संबोधन संस्थान के विकास की स्थिति आज ऐतिहासिक पन्नों में दर्ज है चर्चा को आगे बढ़ते हुए उन्होंने कहा की मनेन्द्रगढ़ रेलवे स्टेशन में गोंडवाना समुद्री जीवाश्म का लगा बोर्ड एवं गोंडवाना फासिल्स पार्क के प्रवेश द्वार में भीतर उतरते ही आभार बोर्ड में इस संस्था का दर्ज नाम हमारे गतिविधियों का साक्षी है।
संस्था उपाध्यक्ष श्री पुष्कर तिवारी ने संबोधन द्वारा प्रतिभावान छात्रों को प्रोत्साहित करने स्वर्ण पदक एवं रजत पदक के वर्षों तक दी जाने वाली सम्मान की जानकारी दी अपने उद्देश्य के अनुरूप आज बहुत ही संस्थाएं इस दिशा में आगे आ चुकी है इसी तरह 1998 से लगातार गुलाब डेहलिया और पुष्प पौध प्रदर्शनी और प्रतियोगिता का आयोजन कर इस संस्था ने लोगों में पर्यावरण एवं गृह वाटिका के प्रति रुचि जागृत करने में सफल रही है। श्रीमती वीरांगना श्रीवास्तव, मैं अपने संस्मरण में कहा कि इस संस्था के साहित्यकार बीरेंद्र श्रीवास्तव के चर्चित पर्यटन लेख से प्रभावित होकर मैंने इस संस्था में जुड़ने का प्रयास किया। अधिवक्ता कल्याण केसरी ने संस्था की 50 वर्षों की यात्रा से संदर्भित अपने संस्मरण प्रस्तुत किया उन्होंने कहा कि संबोधन अपने 50 वर्षों में आज अंचल में अपनी एक विश्वसनीय पहचान बना चुकी है उसके किसी भी कार्य पर अंचल के नागरिक भरोसा करते हैं यह इस संस्था की उपलब्धि है।
कार्यक्रम अध्यक्ष श्री अनिल जैन एवं मुख्य अतिथि श्रीमती इंदिरा सेंगर की उपस्थिति में देर शाम तक चलते इस कार्यक्रम के समापन के पूर्व कार्यक्रम संचालक इशिता सिंह ने संस्था संरक्षक श्रीमती ईंद्रा सेंगर को अपनी भावनाएं व्यक्त करने के लिए आमंत्रित किया। श्रीमती सेंगर ने संबोधित करते हुए कहा कि संबोधन की 50 वर्षों की यात्रा साहित्य कला और पर्यटन तथा पर्यावरण के विकास की संघर्ष पूर्ण यात्रा रही है जिसे शताब्दी वर्ष तक पहुंचाने की जिम्मेदारी नई पीढ़ी के कंधों पर है जो इसे और आगे तक ले जाएगी। इस कार्यक्रम में उपस्थित सम्माननीय अधिवक्ता श्याम बिहारी रैकवार, कल्याण चंद केसरी, नरेंद्र श्रीवास्तव, श्रीमती वीरांगना श्रीवास्तव, उज्जवल सिंह,राशिद कुरैशी, सतिया महाराज, विजय गुप्ता, पत्रकार विनय पांडे, राजेश सिन्हा, एवं रामचरित द्विवेदी बीरेंद्र श्रीवास्तव,सहित सम्माननीय नागरिकों और श्रोताओं की उपस्थिति ने कार्यक्रम को ऊंचाइयां प्रदान की।
राजेश सिन्हा,8319654988
