खड़गवां में फिर टूटा तीन परिवारों का आशियाना, वन विभाग की कार्रवाई पर उठे सवाल
खड़गवां। खड़गवां क्षेत्र में आज फिर वन विभाग ने कार्रवाई करते हुए तीन परिवारों के घर ढहा दिए। विभाग का कहना है कि ये मकान वनभूमि पर बने हुए थे, इसलिए कानूनी रूप से इसे हटाना आवश्यक था। यह बात अपनी जगह सही है कि किसी भी व्यक्ति को दूसरे की जमीन पर घर बनाने का अधिकार नहीं है, और शासन–प्रशासन ऐसे मामलों में कार्रवाई करता ही है।
लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब यह जमीन वन विभाग की थी और परिवार पिछले तीन वर्षों से यहां घर बनाकर रह रहा था, तो वन विभाग तब कहां था? घर एक दिन में नहीं बन जाता। जब नींव रखी गई, दीवारें खड़ी हुईं, छत पड़ा—इन सभी चरणों में विभाग की नजर क्यों नहीं पड़ी?
स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह वन विभाग की लापरवाही या मिलीभगत का परिणाम है। या तो विभाग को शुरुआत में पता ही नहीं था कि यह जमीन उसकी है, या फिर किसी ने आंखें मूंद ली थीं। अब अचानक कार्रवाई कर परिवारों को बेघर कर देना—वह भी कड़ाके की ठंड में—निश्चित रूप से मानवीय संवेदनाओं पर प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है। छोटे-छोटे बच्चे वाले परिवार खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हो गए हैं।
लोग यह भी पूछ रहे हैं कि आखिर किसकी शिकायत पर इतनी बड़ी कार्रवाई की गई और विभाग को अचानक कैसे पता चला कि यह वन भूमि है? यदि विभाग ने समय पर ईमानदारी से काम किया होता, तो आज यह नौबत ही नहीं आती।
जनता का स्पष्ट आरोप है कि यदि कहीं गलती हुई है, तो उसकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी वन विभाग और उसके अधिकारियों की है। ऐसे अधिकारियों पर कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि सरकार की छवि धूमिल न हो और भविष्य में गरीबों पर ऐसी कठोर कार्रवाई से पहले पूरी जांच हो सके।
स्थानीय लोग मांग कर रहे हैं कि प्रशासन मानवीय आधार पर इन परिवारों के पुनर्वास की व्यवस्था तुरंत करे।
राजेश सिन्हा 8391654988
