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गलत रास्ता आसान है, सही रास्ता साहस मांगता है-पूजा खरे
विशेष आलेख/ आज के दौर में गलत रास्ते पर चलना, बुरी संगति में पड़ जाना या बुराई का साथ देना बेहद आसान हो गया है। एक पल लगता है सच से मुंह मोड़ने में, झूठ के साथ खड़े होने में और गलत के आगे खुद को झुका लेने में। लेकिन यही आसान रास्ता अंततः इंसान को भीतर से कमजोर कर देता है।
असल चुनौती तो तब शुरू होती है, जब इंसान बुरे माहौल में रहते हुए भी अपनी अच्छाई को बचाकर रखता है। गलत करने वालों के बीच सही बने रहना कोई मामूली काम नहीं, बल्कि यह सबसे कठिन और साहसिक निर्णयों में से एक होता है।
अक्सर लोग यह सोचकर सच का साथ छोड़ देते हैं कि वे अकेले पड़ जाएंगे। जबकि सच्चाई यह है कि सच और अच्छाई हमेशा अकेले ही चलती है। हर कोई इसे संभालने और इसके लिए खड़े होने की हिम्मत नहीं रखता। बुराई के खिलाफ आवाज उठाने के लिए, अकेले लड़ने का साहस चाहिए।
इसलिए यह मान लेना चाहिए कि अगर हम सच के रास्ते पर अकेले हैं, तो भी हम कमजोर नहीं हैं। बल्कि यह हमारी ताकत का प्रमाण है। अकेले रहकर भी सही रास्ते पर टिके रहना, समाज के लिए एक मिसाल बनता है।
जरूरत है कि हम हर परिस्थिति में सही रास्ता चुनें, सच का साथ दें और अपनी अच्छाई को कभी न छोड़ें। क्योंकि अंत में जीत उसी की होती है, जो हालात से समझौता नहीं करता।
राजेश सिन्हा 8319654988
