“NEET विवाद ने उठाए बड़े सवाल: लोकतंत्र में जवाबदेही ही सबसे बड़ी कसौटी”- पी.एस.मलतीयार
विशेष लेख- लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत सरकार और जनता के बीच विश्वास का रिश्ता है। यह विश्वास तभी मजबूत होता है, जब सरकार अपनी उपलब्धियों पर समर्थन स्वीकार करे और अपनी कमियों पर जनता के सवालों का जवाब भी दे। लोकतंत्र का सार यही है कि जहाँ सरकार सही हो, वहाँ उसका समर्थन किया जाए और जहाँ वह असफल हो, वहाँ उससे कठोर सवाल पूछे जाएँ।
हाल के वर्षों में सामने आए NEET परीक्षा विवाद ने केवल परीक्षा प्रणाली पर ही नहीं, बल्कि शासन की जवाबदेही और पारदर्शिता पर भी गंभीर प्रश्न खड़े किए हैं। लाखों विद्यार्थियों और उनके परिवारों से जुड़े इस मुद्दे ने यह स्पष्ट किया है कि किसी भी परीक्षा की विश्वसनीयता केवल उसके परिणामों से नहीं, बल्कि उसकी निष्पक्षता पर जनता के विश्वास से तय होती है।
यह भी सच है कि भ्रष्टाचार केवल सरकारों से पैदा नहीं होता। समाज की चुप्पी, लालच और गलत को स्वीकार करने की प्रवृत्ति भी उसे बढ़ावा देती है। जब तक खरीदने वाला मौजूद रहेगा, बेचने वाला भी पैदा होता रहेगा। इसलिए व्यवस्था सुधारने की जिम्मेदारी केवल सरकार की नहीं, बल्कि समाज की भी है।
हालाँकि इसका अर्थ यह नहीं कि सरकार अपनी जिम्मेदारी से पीछे हट जाए। किसी भी लोकतांत्रिक सरकार का पहला दायित्व जनता के प्रति जवाबदेह होना है। यदि छात्रों के भविष्य से जुड़ा इतना बड़ा विवाद सामने आता है, तो सरकार का दायित्व है कि वह समय पर संवाद करे, निष्पक्ष जाँच सुनिश्चित करे और दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करे। सबसे महत्वपूर्ण यह है कि जनता को यह भरोसा दिलाया जाए कि उनकी चिंता सुनी और समझी जा रही है।
आज यह चिंता भी सामने आ रही है कि संवाद की जगह प्रचार ने ले ली है। प्रेस कॉन्फ़्रेंस की जगह एकतरफ़ा संदेश, सवालों की जगह नारों का शोर और आलोचना का उत्तर तथ्यों के बजाय आरोपों से दिया जाना लोकतांत्रिक परंपराओं के लिए शुभ संकेत नहीं माना जा सकता। लोकतंत्र में किसी सरकार की शक्ति उसकी चुप्पी से नहीं, बल्कि कठिन सवालों का सामना करने के साहस से आँकी जाती है।
आज का युवा पहले से अधिक जागरूक है। वह जानकारी जुटाता है, तथ्यों की पड़ताल करता है और दावों की तुलना करता है। इसलिए केवल भावनात्मक नारों से उसे लंबे समय तक प्रभावित नहीं किया जा सकता। युवाओं को प्रतिद्वंद्वी नहीं, बल्कि लोकतंत्र के सहभागी नागरिक के रूप में स्वीकार करना समय की आवश्यकता है।
यह मुद्दा केवल NEET परीक्षा तक सीमित नहीं है। यह उस भरोसे का प्रश्न है, जिस पर किसी भी लोकतांत्रिक राष्ट्र का भविष्य टिका होता है। यदि मेहनत करने वाले छात्र को यह महसूस होने लगे कि उसकी मेहनत से अधिक प्रभाव पैसे, पहुँच या भ्रष्ट तंत्र का है, तो यह केवल शिक्षा व्यवस्था की नहीं, बल्कि पूरे लोकतांत्रिक ढाँचे के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
सरकारें बदलती रहेंगी, राजनीतिक दल और चेहरे भी बदलेंगे, लेकिन यदि पारदर्शिता, जवाबदेही और संवेदनशीलता नहीं बदली, तो देश का युवा बार-बार अपने भविष्य की सुरक्षा के लिए सड़कों पर उतरने को मजबूर होगा।
लोकतंत्र में सत्ता का सम्मान केवल तालियों से नहीं, बल्कि जवाबदेही से मिलता है। सवाल पूछना अपराध नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। लोकतंत्र की मजबूती इसी में है कि सरकार जनता के प्रश्नों का उत्तर दे, विश्वास कायम रखे और व्यवस्था को अधिक पारदर्शी एवं न्यायपूर्ण बनाए।
