गांधीवाद और गांधीवादी विचारों की आज के परिप्रेक्ष्य में प्रासंगिकता
साहित्यकार पुष्कर लाल तिवारी ने कहा-सत्य, अहिंसा, सत्याग्रह और सर्वोदय के सिद्धांत आज भी समाज के लिए मार्गदर्शक
मनेंद्रगढ़। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती के अवसर पर अंचल के साहित्यकार एवं गांधीवादी विचारों के अनुयायी पुष्कर लाल तिवारी ने गांधीवाद और गांधीवादी विचारों की वर्तमान समय में प्रासंगिकता पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि आज देश अनेक प्रकार के बदलावों के दौर से गुजर रहा है। ऐसे समय में यह विचार करना आवश्यक है कि देश और समाज के विकास में गांधीवादी विचारों की क्या भूमिका हो सकती है।
पुष्कर लाल तिवारी ने कहा कि गांधीवाद को केवल किताबी ज्ञान के रूप में नहीं देखा जा सकता। यह जीवन जीने की एक पद्धति है। महात्मा गांधी ने सत्य, अहिंसा, सत्याग्रह, सर्वोदय, स्वदेशी और ट्रस्टीशिप जैसे सिद्धांतों को केवल भाषणों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उन्हें अपने जीवन और आचरण में उतारने का प्रयास किया। यही कारण है कि उनके विचार आज भी गांधीवाद के रूप में समाज को दिशा देते हैं।
उन्होंने कहा कि गांधी के लिए सत्य केवल एक शब्द नहीं था, बल्कि सत्य को उन्होंने ईश्वर का स्वरूप माना। इसी प्रकार अहिंसा का अर्थ केवल हिंसा नहीं करना नहीं, बल्कि मन, कर्म और वचन से किसी को दुख न पहुंचाना भी है।
अन्याय के खिलाफ सत्याग्रह को बनाया हथियार
गांधीवादी दर्शन के सत्याग्रह सिद्धांत पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी सत्याग्रह को अन्याय के खिलाफ संघर्ष का माध्यम मानते थे। उनका संदेश था कि व्यक्ति से नहीं, बल्कि उसकी बुराई से संघर्ष किया जाए। अंग्रेजों के खिलाफ स्वतंत्रता आंदोलन में भी गांधी ने संघर्ष किया, लेकिन उनका रास्ता नफरत और प्रतिशोध का नहीं था।
स्वदेशी और आत्मनिर्भरता का संदेश
पुष्कर लाल तिवारी ने कहा कि गांधी का चरखा केवल कपड़ा बनाने का साधन नहीं था, बल्कि आत्मनिर्भरता और आत्मसम्मान का प्रतीक था। आज आत्मनिर्भरता, स्वदेशी और स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा देने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को गांधी के स्वदेशी विचारों के संदर्भ में देखा जा सकता है।
सर्वोदय और ट्रस्टीशिप की आवश्यकता
उन्होंने गांधी के सर्वोदय और ट्रस्टीशिप के सिद्धांत को भी वर्तमान समय के लिए महत्वपूर्ण बताया। गांधी का विचार था कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति को आगे बढ़ने का समान अवसर मिले और विकास का लाभ सभी तक पहुंचे। ट्रस्टीशिप की अवधारणा के अनुसार संपत्ति रखने वाले व्यक्ति को समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए और अपनी संपदा का उपयोग व्यापक सामाजिक हित में करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि बढ़ती आर्थिक असमानता के दौर में गांधी के सामाजिक सरोकारों और ट्रस्टीशिप की अवधारणा पर नए सिरे से चर्चा की आवश्यकता है।
सामाजिक समरसता और सहिष्णुता पर जोर
पुष्कर लाल तिवारी ने कहा कि वर्तमान समय में राजनीति और समाज में असहिष्णुता जैसी चुनौतियां दिखाई देती हैं। ऐसे समय में गांधी का कौमी एकता, सहनशीलता और सर्वजन स्वीकार्यता का संदेश और अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है। समाज में संवाद, आपसी सम्मान और भाईचारे की भावना को मजबूत करना गांधीवादी विचारों की सार्थकता को आगे बढ़ा सकता है।
पर्यावरण संरक्षण में भी प्रासंगिक गांधी विचार
पर्यावरण के संदर्भ में उन्होंने कहा कि गांधी प्राकृतिक संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग के पक्षधर थे। वर्तमान समय में जलवायु परिवर्तन और वैश्विक तापमान में वृद्धि जैसी चुनौतियों के बीच प्राकृतिक संसाधनों का संतुलित उपयोग और पर्यावरण संरक्षण अत्यंत आवश्यक है। ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों के विकास के साथ-साथ उनके विवेकपूर्ण उपयोग पर भी ध्यान देना होगा।
सादगी और ‘जियो और जीने दो’ का संदेश
उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी व्यक्तिगत और सार्वजनिक जीवन में सादगी के पक्षधर थे। उनका जीवन स्वयं सादगी, संयम और सामाजिक जिम्मेदारी का उदाहरण रहा। ‘जियो और जीने दो’ की भावना भी गांधीवादी जीवन-दर्शन का महत्वपूर्ण पक्ष है, जो आज के उपभोक्तावादी दौर में विशेष महत्व रखता है।
युद्ध नहीं, शांति ही स्थायी समाधान
अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए पुष्कर लाल तिवारी ने कहा कि रूस-यूक्रेन तथा इजराइल-फिलिस्तीन जैसे संघर्षों ने व्यापक जनहानि और विनाश को जन्म दिया है। ऐसे हालात में विश्व समुदाय को गंभीरता से विचार करना चाहिए कि युद्ध किसी भी समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सकता। संवाद, शांति और अहिंसा के रास्ते से विवादों के समाधान की संभावनाओं को मजबूत करना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि मार्टिन लूथर किंग जूनियर और नेल्सन मंडेला सहित अनेक वैश्विक नेताओं और आंदोलनों पर गांधी के अहिंसक संघर्ष के विचारों का प्रभाव रहा है।
गांधीवाद कायरता नहीं, अन्याय के खिलाफ संघर्ष का संदेश देता है
गांधीवाद की आलोचनाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि गांधीवाद कायरता का संदेश नहीं देता। गांधी स्वयं अन्याय के सामने झुकने के पक्षधर नहीं थे। उनके विचार में अन्याय और अनीति को सहन करना भी एक प्रकार की हिंसा है। गांधी का दर्शन सत्य और अहिंसा के माध्यम से अन्याय के खिलाफ दृढ़ संघर्ष का मार्ग प्रस्तुत करता है।
पुष्कर लाल तिवारी ने कहा कि देश और समाज के हित में गांधी दर्शन कल भी प्रासंगिक था, आज भी प्रासंगिक है और आने वाले समय में भी इसके मूल सिद्धांत मानवता का मार्गदर्शन करते रहेंगे।
खबर जागरण न्यूज (देश की आवाज)
