देश की सबसे बड़ी चुनौती बेरोज़गारी, युवाओं से नफ़रत नहीं न्याय की राजनीति अपनाने की अपील-पी.एस.मलतीयार
राजेश सिन्हा ,8319654988
नई दिल्ली। देश में बढ़ती बेरोज़गारी, शिक्षा, स्वास्थ्य और युवाओं के भविष्य को लेकर एक विचार लेख में मौजूदा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। लेख में कहा गया है कि देश के सामने सबसे बड़ी चुनौती धर्म नहीं बल्कि बेरोज़गारी है और युवाओं के भविष्य को प्रभावित करने वाली नीतियों पर गंभीर चर्चा की आवश्यकता है।
आज बड़ी संख्या में बेरोज़गार युवाओं का ध्यान रोजगार, शिक्षा और आर्थिक अवसरों जैसे मूल मुद्दों से हटाकर धर्म और जाति आधारित बहसों की ओर मोड़ा जा रहा है। इसमें कहा गया है कि युवाओं को अपनी बदहाली के वास्तविक कारणों पर विचार करने और लोकतांत्रिक तरीके से अपने अधिकारों के लिए आवाज़ उठानी चाहिए।
विचार लेख में लोकतंत्र की अवधारणा पर भी चर्चा करते हुए कहा गया है कि लोकतंत्र केवल चुनाव तक सीमित नहीं है, बल्कि नागरिकों की असहमति व्यक्त करने की स्वतंत्रता और अधिकारों की रक्षा भी इसका महत्वपूर्ण हिस्सा है।
युवाओं से संविधान, इतिहास तथा मजदूर और किसान आंदोलनों का अध्ययन करने की अपील करते हुए लेख में कहा गया है कि उनका वास्तविक साथी वह है जो रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और सम्मान जैसे बुनियादी मुद्दों पर उनके साथ खड़ा हो। साथ ही यह भी कहा गया है कि समाज को विभाजित करने वाली राजनीति के बजाय न्याय, समान अवसर और सामाजिक-आर्थिक विकास पर आधारित राजनीति को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
लेख का निष्कर्ष है कि केवल सत्ता परिवर्तन पर्याप्त नहीं है, बल्कि ऐसी व्यवस्था विकसित करने की आवश्यकता है जो आर्थिक असमानता को कम करे, मेहनतकश वर्ग को सशक्त बनाए और युवाओं के लिए बेहतर अवसर सुनिश्चित करे।
